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गैलरी में उनके जीवन के दुर्लभ चित्रों के दर्शन करें।
"जब मैंने पहली बार संत जी के दर्शन किए, तो उनके चेहरे पर वही तेज था जो गोवर्धन की सुबह की पहली किरण में होता है।"
— एक अनाम भक्त"संत जी से मेरा परिचय मेरे पति ने कराया था। वे मेरे ससुर के मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक थे। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, मुझे एहसास हुआ कि वे कितने महान संत थे।"
— सोमा कुमार (फेसबुक, नवम्बर 2018)"एक बार संत जी महाराज ने घाटी बहालराय वाले घर में जो कि मथुरा में है, मुझसे पूछा कि बड़े होकर क्या बनोगे तो मैंने कहा 'दरोगा'। तबसे संत जी ने मुझे दरोगा जी कहना शुरू कर दिया। फिर जब भी मैं गोवर्धन जाता या वो मथुरा आते तो मुझे दरोगा जी कह कर ही बुलाते... जय हो श्री श्री 108 संत जी महाराज की...."
— विवेक भटनागर (फेसबुक, दिसम्बर 2018)"संत जी कहते थे, 'गिरिराज की सेवा ही राधा-कृष्ण की साक्षात् सेवा है'। उन्होंने कभी खुद के लिए कुछ नहीं माँगा।"
— आश्रम सेवक"संत जी महाराज से मिलने पर अक्सर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाने का आदेश मिलता था। बचपन में उनके साथ संपूर्ण गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोवर्धन पर्वत भगवान कृष्ण के समय के साक्षी हैं जिनको प्रभु ने स्वयं स्पर्श किया है।"
— एक भक्त की स्मृति"हे मेरे गुरुदेव करुणा सिंधु, करुणा कीजिए, हूं अधम आधीन अशरण, अब शरण में लीजिए। सब जगह मंजिल भटक कर अब शरण ली आपकी, पार करना या न करना, दोनों मर्जी आपकी।"
— एक समर्पित भक्त"एक पूजनीय स्थल, जहाँ संतों और भक्तों की देखभाल पूरी श्रद्धा और बिना किसी भेदभाव के की जाती है। इस निवास स्थान के निर्माता श्री के. पी. रामानुज दास बहुत ही परोपकारी थे। हरि गोकुल तीर्थ पास ही है, जहाँ श्री नंद रायजी अपने समर्थकों के साथ रुके थे।"
— हरिहर जी (ब्लॉगर, 2008) ↗संत जी और आश्रम के साथ प्रत्येक भक्त की यात्रा का अपना एक अनूठा आध्यात्मिक महत्व है। यदि आपके पास कोई भी अनमोल स्मृति, प्रसंग या अनुभव है जिसे आप सभी के साथ साझा करना चाहते हैं, तो हमें उन्हें यहाँ सम्मिलित करने में अत्यंत सम्मान महसूस होगा। कृपया हमें [email protected] पर ईमेल करें या व्हाट्सएप के माध्यम से हमसे संपर्क करें।