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Param Pujya Sant Shri KP Ramanujdas
जन्म तिथि
११ नवम्बर १९११
महासमाधि
२८ जनवरी २००२
श्री श्री १०८ संत के.पी. रामानुजदास जी का जन्म ग्राम उधावर, जिला मैनपुरी में एक जमींदार परिवार में 11 नवंबर 1911 को हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर में हुई जहां पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी उनके सहपाठी थे। विलक्षण प्रतिभा और विरक्त स्वभाव के कारण वे अक्सर एकांतवास में चले जाते थे। माँ के आग्रह पर उन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाया, परंतु जन कल्याण के उद्देश्य से शीघ्र ही सांसारिक वस्तुओं का त्याग कर दिया।
दक्षिण दिशा में जाकर रामानुज संप्रदाय में दीक्षा ली। गुफा में कठोर तपस्या के बाद, गुरु के आदेश पर ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन को अपना साधना स्थल बनाया और कुसुम सरोवर के पास कुटिया में निवास करने लगे। प्रत्येक नव दुर्गा में संत जी समाधिलीन होते थे और अष्टमी की रात्रि बाहर आकर भक्तों को आशीर्वाद देते थे। संत जी अपने प्रत्येक शिष्य के परिवार और मित्रों को हमेशा नाम से याद रखते थे।
राजमाता सिंधिया के आग्रह पर वे ग्वालियर मंदिर में भी रहे। तब तक बहुत लोग संत जी के साथ जुड़ चुके थे और उनके विशेष आग्रह और सहयोग से सन १९८२ में सन्त निवास का निर्माण हुआ। संत जी ने आश्रम में ब्रजेश्वरी देवी का आवाहन करके मां को मंदिर में विराजमान किया। सन १९६४ में बाबू रामकिशोर से दंडवती परिक्रमा के दौरान उनकी भेंट हुई, जिन्हें उन्होंने हमेशा बड़े भाई का सम्मान दिया।
संत जी ने अपना शरीर पुष्प नक्षत्र के दिन पौष मास की पूर्णिमा तिथि को संवत् २०५८ अर्थात २८ जनवरी २००२ में संत निवास में त्याग दिया। आज भी उनकी समाधि आश्रम में स्थित है, जो भक्तों के लिए असीम शांति और प्रेरणा का स्रोत है।

परमसंत श्रद्धेय सदगुरुदेव संत जी महाराज की साधना स्थली को सादर नमन। तमिलनाडु स्थित थोथादरी पीठ पर कठोर तप से बाबा रामानुज संप्रदाय से दीक्षित होकर संत के. पी. रामानुजदास कहलाये। सादर नमन 🙏




रामानुज संप्रदाय के संस्थापक, जिन्होंने विशिष्टाद्वैत वेदांत और श्री वैष्णव परंपरा की स्थापना की।
सन्त निवास के प्रकाश पुंज, जो भगवान रामानुजाचार्य के परम भक्त और अनुयायी हैं।
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